परिचय: आंतें ही हैं सेहत की जड़
कहावत है—”जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन।” लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाए-पिए का असर सिर्फ मन पर ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर की सेहत पर पड़ता है? और इस पूरी प्रक्रिया का केंद्र हैं आपकी आंतें।

हाल ही में हुए एक सर्वे के मुताबिक, 56% भारतीय परिवार पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं . गैस, एसिडिटी और अपच जैसी दिक्कतें आम हो गई हैं। 50% से अधिक लोग इन तीन में से कम से कम एक समस्या से परेशान हैं . यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं, लेकिन इससे भी जरूरी बात यह है कि 77% भारतीय माताएं पाचन स्वास्थ्य को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं यानी जागरूकता तो है, लेकिन सही उपाय न मिल पाने के कारण समस्या बनी रहती है।
अच्छी खबर यह है कि 70% से अधिक लोग पाचन समस्याओं के समाधान के लिए घरेलू नुस्खों और खान-पान की आदतों को सुधारने पर भरोसा करते हैं और सबसे अच्छी बात यह है कि इन नुस्खों के लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं—ये सब आपकी रसोई में ही मौजूद हैं।
आइए जानते हैं 5 देसी नुस्खे जो आपकी आंतों को दुरुस्त रखेंगे और पेट की सेहत सुधारकर कई बीमारियों को दूर भगाएंगे।
नुस्खा नंबर 1: अदरक और सेंधा नमक—पाचन अग्नि प्रज्वलित करें
कैसे करें इस्तेमाल?
भोजन से पहले ताजा अदरक का एक छोटा टुकड़ा लें, उस पर सेंधा नमक और नींबू के रस की कुछ बूंदें डालकर चबाएं
कैसे करता है काम?
आयुर्वेद के अनुसार, अदरक में पाचन को बढ़ाने वाले गुण होते हैं। यह भूख बढ़ाता है, मतली (नौजा) को नियंत्रित करता है और पाचक रसों को सक्रिय करता है . वहीं सेंधा नमक मेटाबॉलिज्म को सुधारता है, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है और पीएच बैलेंस को ठीक करता है
क्या कहता है आधुनिक विज्ञान?
आधुनिक रिसर्च भी यह मानती है कि अदरक में मौजूद जिंजरोल और शोगोल नामक यौगिक पाचन तंत्र की मांसपेशियों को आराम देते हैं और गैस बनने से रोकते हैं।
कब न करें इस्तेमाल?
अगर आपके शरीर में “बहुत अधिक गर्मी” (हाई पित्त) की समस्या है, तो इस नुस्खे का सेवन सावधानी से करें और अपने शरीर की प्रतिक्रिया देखें
नुस्खा नंबर 2: छाछ (Buttermilk)—देसी प्रोबायोटिक का खजाना
कैसे करें इस्तेमाल?
दोपहर के भोजन के साथ एक गिलास ताजी छाछ पिएं। आप चाहें तो इसमें काला नमक, भुना जीरा और ताजी हरी धनिया डालकर इसका स्वाद और गुण दोनों बढ़ा सकते हैं।
क्यों है फायदेमंद?
छाछ एक नेचुरल प्रोबायोटिक है। न्यूट्रिशनिस्ट पारिक्षा राव के अनुसार, “प्रोबायोटिक्स लाइव गुड बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन संतुलन बनाए रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं” . छाछ पेट को ठंडक पहुंचाती है और पाचन में सहायता करती है
क्या कहता है रिसर्च?
हाल के अध्ययन बताते हैं कि प्रोबायोटिक्स युक्त आहार न सिर्फ पाचन सुधारते हैं, बल्कि त्वचा, सूजन, मानसिक स्पष्टता और हार्मोनल संतुलन पर भी सकारात्मक असर डालते हैं
नुस्खा नंबर 3: कान्जी—उत्तर भारत का गुप्त रहस्य
कैसे बनाएं?
गाजर या चुकंदर को छोटे टुकड़ों में काट लें। इन्हें मिट्टी के बर्तन में डालें, उसमें पानी, थोड़ी सी राई का पाउडर, लाल मिर्च और नमक डालकर 3-4 दिनों के लिए धूप में रखें। यह फर्मेंटेड ड्रिंक तैयार हो जाएगी।
क्यों है खास?
कान्जी एक पारंपरिक फर्मेंटेड ड्रिंक है जो प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है
. यह आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है।
क्या कहता है विज्ञान?
फर्मेंटेड फूड्स में लैक्टोबैसिलस जैसे प्रोबायोटिक बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो आंतों के माइक्रोबायोम को संतुलित रखते हैं। यह सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम से जुड़ा होता है
नुस्खा नंबर 4: लहसुन और प्याज—प्रीबायोटिक का पावरहाउस
कैसे करें इस्तेमाल?
कच्चे लहसुन की एक कली को सुबह खाली पेट पानी के साथ निगल लें। प्याज को सलाद के रूप में भोजन के साथ शामिल करें।
कैसे करता है काम?
लहसुन और प्याज प्रीबायोटिक्स के बेहतरीन स्रोत हैं। प्रीबायोटिक्स वे फाइबर होते हैं जो गुड बैक्टीरिया (प्रोबायोटिक्स) को पोषण देते हैं और उन्हें बढ़ने में मदद करते हैं . लहसुन और प्याज में इनुलिन और एफओएस (fructooligosaccharides) नामक तत्व होते हैं जो गुड बैक्टीरिया को फीड करते हैं
क्या कहता है रिसर्च?
मानव आंत में बिफीडोबैक्टीरिया जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए प्रीबायोटिक्स सबसे जरूरी तत्व हैं। ये बैक्टीरिया शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFAs) बनाते हैं जो आंतों की दीवार को स्वस्थ रखते हैं
नुस्खा नंबर 5: त्रिफला—आयुर्वेद का वरदान
कैसे करें इस्तेमाल?
रात में सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें।
क्यों है इतना खास?
त्रिफला तीन फलों—आंवला, हरड़ और बहेड़ा—से मिलकर बना है। यह आयुर्वेद का सबसे प्रसिद्ध फॉर्मूला है जो पाचन तंत्र पर तीन स्तरों पर काम करता है:
- आंवला (विटामिन C से भरपूर): आंतों की दीवार को मजबूत बनाता है
- हरड़ (हरीतकी): कब्ज दूर करता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है
- बहेड़ा (बिभीतकी): फायदेमंद बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है
क्या कहता है रिसर्च?
सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (CCRAS) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि कई भारतीय फल और सब्जियां प्रीबायोटिक गतिविधि में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। बेल, अनार, पपीता, केला और धनिया ने प्रोबायोटिक बैक्टीरिया के साथ मिलकर शानदार प्रीबायोटिक प्रभाव दिखाया . यह अध्ययन बताता है कि इन फलों का प्रीबायोटिक पोटेंशियल बाजार में उपलब्ध कमर्शियल प्रीबायोटिक्स से भी बेहतर है
.
आंतों की सेहत क्यों है इतनी जरूरी?
1. पोषण का अवशोषण
आंतें ही वह जगह हैं जहां आपके खाने से पोषक तत्व रक्त में अवशोषित होते हैं। अगर आंतें ठीक नहीं हैं, तो आप कितना भी पौष्टिक खाना खा लें, उसका फायदा नहीं मिलेगा।
2. इम्यूनिटी का केंद्र
क्या आप जानते हैं कि हमारी 70% से अधिक इम्यूनिटी आंतों में ही बनती है? . न्यूट्रिशन, गट माइक्रोबायोटा और इम्यूनिटी के बीच गहरा संबंध है। इस तंत्र में गड़बड़ी होने पर कई बीमारियां जन्म लेती हैं—जिनमें ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, एलर्जी और मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर शामिल हैं
3. मानसिक स्वास्थ्य
आंत और दिमाग का सीधा संबंध है। इसे गट-ब्रेन एक्सिस कहते हैं। आंतों में बनने वाले केमिकल सीधे हमारे मूड, तनाव और चिंता को प्रभावित करते हैं
क्या न करें? (आंतों के दुश्मन)
1. जंक फूड और सोडा
अहमदाबाद के गैस्ट्रो सर्जन डॉ. संजीव हरिभक्ति के अनुसार, सोडा, जंक फूड और बैठे रहने वाली जीवनशैली के कारण पिछले 5 सालों में पेट और आंतों की बीमारियों के मरीजों में 3 गुना वृद्धि हुई है . हर 10 में से 3 मरीजों को सर्जरी की नौबत आ जाती है
2. प्रोसेस्ड फूड
रेफाइड ग्रेन्स (सफेद चावल, मैदा से बनी चीजें) में फाइबर की कमी होती है और ये गट डिस्बायोसिस (आंतों के बैक्टीरिया का असंतुलन) का कारण बन सकते हैं
3. एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक सेवन
बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार एंटीबायोटिक्स लेना आंतों के गुड बैक्टीरिया को खत्म कर सकता है
आंतों को हेल्दी रखने के गोल्डन नियम
1. फाइबर को कहें हां
भारतीय खाने में फाइबर के बेहतरीन स्रोत हैं—दालें, सब्जियां, फल, और साबुत अनाज। ICMR के अनुसार, एक वयस्क को रोजाना कम से कम 40 ग्राम डाइटरी फाइबर लेना चाहिए
2. फर्मेंटेड फूड खाएं
दही, छाछ, इडली, डोसा, धोकला, कान्जी, अचार—ये सभी नेचुरल प्रोबायोटिक्स हैं
. इन्हें अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
3. पानी खूब पिएं
पानी की कमी से कब्ज की समस्या होती है और आंतों की सफाई ठीक से नहीं हो पाती।
4. एक्सरसाइज नियमित करें
सर्वे के अनुसार, लोगों में एक्सरसाइज की औसत फ्रीक्वेंसी सिर्फ 1.5 बार प्रति सप्ताह है
. इसे बढ़ाने की जरूरत है। रोजाना 30 मिनट की वॉक भी आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद है।
5. तनाव कम करें
क्रोनिक स्ट्रेस (लगातार तनाव) भी आंतों के बैक्टीरिया के असंतुलन का कारण बनता है
क्या कहता है आधुनिक विज्ञान?
हाल के वर्षों में गट हेल्थ पर रिसर्च ने यह साबित कर दिया है कि आंतें सिर्फ पाचन का केंद्र नहीं हैं, बल्कि पूरे शरीर की सेहत की जड़ हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, न्यूट्रिशन-गट माइक्रोबायोटा-इम्यूनिटी एक्सिस हमारी सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके बिगड़ने से कई बीमारियां जन्म लेती हैं
भारत में गट माइक्रोबायोम टेस्टिंग का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) ~6.9% है
. यह दिखाता है कि लोग अब अपनी आंतों की सेहत को समझने और सुधारने में गंभीरता से रुचि ले रहे हैं।
निष्कर्ष
“पेट की सेहत से दूर होंगी बीमारियां”—यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि विज्ञान सम्मत सत्य है। अगर आपकी आंतें स्वस्थ हैं, तो आपका पाचन तंत्र मजबूत होगा, इम्यूनिटी बेहतर होगी, और बीमारियां दूर रहेंगी।
ऊपर बताए गए 5 देसी नुस्खे—अदरक-सेंधा नमक, छाछ, कान्जी, लहसुन-प्याज, और त्रिफला—आपकी रसोई में मौजूद हैं। इन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करें और फर्क खुद महसूस करें।
लेकिन याद रखें, ये नुस्खे दवा नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा हैं। अगर आपको कोई गंभीर बीमारी है या लंबे समय से पाचन संबंधी परेशानी है, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
स्वस्थ आंत, स्वस्थ जीवन!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: क्या रोजाना दही खाने से पेट की सेहत ठीक रहती है?
उत्तर: जी हां, दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि मार्केट के फ्लेवर्ड दही की बजाय ताजा, घर का बना दही खाएं।
प्रश्न 2: क्या अदरक रोज खाना सेफ है?
उत्तर: आमतौर पर हां। लेकिन अगर आपको गैस्ट्रिक अल्सर या पित्त प्रकृति की समस्या है, तो अदरक का सेवन सीमित मात्रा में करें
प्रश्न 3: क्या त्रिफला हर रोज लिया जा सकता है?
उत्तर: जी हां, त्रिफला एक सुरक्षित आयुर्वेदिक फॉर्मूला है और इसे रोजाना रात में लिया जा सकता है। लेकिन प्रेग्नेंसी में डॉक्टर की सलाह लें।
प्रश्न 4: आंतों की सेहत सुधरने में कितना समय लगता है?
उत्तर: अगर आप नियमित रूप से सही डाइट और नुस्खे अपनाते हैं, तो 2-4 हफ्तों में फर्क नजर आने लगता है। पूरी तरह से आंतों का माइक्रोबायोम बदलने में 3-6 महीने लग सकते हैं।
प्रश्न 5: क्या सिर्फ घरेलू नुस्खों से पेट की गंभीर बीमारी ठीक हो सकती है?
उत्तर: घरेलू नुस्खे रोकथाम और हल्की समस्याओं में कारगर हैं। गंभीर बीमारियों में डॉक्टर की सलाह और इलाज जरूरी है। ये नुस्खे डॉक्टरी इलाज के साथ सहायक के रूप में काम करते हैं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी चिकित्सीय स्थिति के लिए कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें।